Dhanteras 2020| dhanvrudhi upaay| swastik yantra|jyotish doctor
by admin | Nov 11, 2020 | astrology |

काली कल्याणकारी!
इस वर्ष दीपोत्सव पाँच दिनों का न होकर चार दिनों का है अतः धनतेरस से लेकर भाईदूज तक के पर्वों के सही समय, पूजन और उपायों के लिए पूर्ण सजगता आवश्यक है, इस बार कुछ विशिष्ट ग्रह-नक्षत्र संयोग बन रहे हैं किन्तु वह संयोग अत्यंत अल्प समय हेतु ही रहेंगें परन्तु यह अवश्य है कि इस दीपोत्सव किये गए यह सरल उपाय आपको अवश्य ही स्वास्थ्य, धन-समृद्धि और संतुष्टि तथा सिद्धि प्रदान करने वाले होंगें।
धनतेरस- यह दिवस पंचदिवसीय दीपोत्सव का प्रथम पर्व है जब हम पर्व कहते हैं तो इसे सामान्य तौर पर उत्सव या आनंद के पलों से जोड़ के देखा जाता है परंतु ज्योतिष शास्त्र में पर्व का अर्थ है विशिष्ट तिथि अथवा ऐसे विशिष्ट योग जिनमें ग्रह-नक्षत्र-वार-तिथि-घटी-पल आदि के योग में स्थान विशेष की मानव जाति द्वारा किये गए कर्म के द्वारा सर्वाधिक शुभ फल प्रदान होता है अतः इस पर्व शब्द को गहनता और गंभीरता से लेना चाहिए।
धनतेरस 2020 की तिथि, समय,पूजन और उपाय-
इस वर्ष धनत्रयोदशी (धनतेरस) माँ लक्ष्मी के शुभ दिन शुक्रवार कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी अर्थात 13 नवम्बर 2020 को है परंतु इस दिन के पूजन का समय इस बार मात्र 38 मिनट का है। धनत्रयोदशी का पूजन प्रदोषकाल में त्रयोदशी तिथि को सूर्यास्त के बाद स्थिर लग्न और स्थिर नवमांश में सर्वोत्तम माना गया है
13 नवम्बर को लखनऊ में सूर्यास्त सांय 5:17 पर होगा, प्रदोषकाल सांय 5:17 से लेकर रात्रि के 7:55 तक रहेगा और वृषभ लग्न सांय 5:21 से लेकर सांय 7:17 तक रहेगा, किन्तु त्रयोदशी तिथि 13 नवम्बर को सांय 5:59 तक ही रहेगी अतः इन सारे योगों को शास्त्रों के दिये निर्देशों पर निश्चित करने पर धनतेरस का पूजन 13 नवम्बर को सांय 5:21 से सांय 5:59 के मध्य ही करना सर्वोत्तम रहेगा।
विशेष:
जो व्यक्ति आभूषण, वाहन, पात्र आदि किसी प्रकार की वस्तुओं का क्रय करना चाहते हैं वे 13 नवम्बर को मध्यान्ह काल से लेकर सांय 5:59 तक के मध्य ही क्रय करें तो सर्वोत्तम है किसी भी स्थिति में सांय 5:59 के बाद कोई भी वस्तु न खरीदें अन्यथा सांय 5:59 के बाद भद्रा लगने के कारण उस वस्तु का सुख न उठा पाएंगें , अतः इसका विशेष ध्यान रखें।
अब धनत्रयोदशी के दो अचूक उपाय बताता हूँ पहला उपाय (अ) उनके लिए है जो किसी गंभीर बीमारी से परेशान हैं अथवा वे लोग जो सुखी और निरोगी रहना चाहते हैं उनके लिए है दूसरा उपाय (ब) उनके लिए है जो धन-संपत्ति और कर्ज मुक्ति चाहते हैं। दोनों में से कोई एक उपाय ही एक व्यक्ति को करना है हाँ एक ही घर के अलग अलग व्यक्ति या पति पत्नी दोनों अलग अलग दोनो उपाय कर सकते हैं परंतु किसी भी दशा में एक ही व्यक्ति द्वारा दोनो उपाय नहीं होने हैं अन्यथा किसी भी उपाय का फल प्राप्त नहीं होगा।
(अ) उपाय1– स्वास्थ्य, निरोगी शरीर, असाध्य रोगों से मुक्ति, लंबी आयु, मन की संतुष्टि और संतोष हेतु यह उपाय करें (उपाय आप किसी अन्य रोगी व्यक्ति के लिए भी कर सकते हैं बस मंत्र जपने से पूर्व उस व्यक्ति का नाम लेकर कहें कि यह उपाय उसके लिए कर रहा/रहीं हूँ-
°सर्वप्रथम ऊपर बताये गए धनतेरस के पूजन के समय का ध्यान रखें क्योंकि यह उपाय आपको उसी समय अंतराल में पूर्ण कर लेना है।
° अपने पूजन स्थल पर एक साफ सफेद कागज बिछाएं और उस कागज के बीचोबीच एक घी (खड़ी जोत का) का दीपक स्थापित कर उसे प्रज्ज्वलित करें।
° दीपक के चारों ओर सफेद कागज का जितना हिस्सा दिखाई दे रहा है उस पूरे हिस्से को जौ बिछा के ढक दें।
°उसके बाद उस जौ पर सात बार बहुत थोड़े थोड़े जल से छींटे दें।
° छींटें देने के बाद अपने कुलदेवता अथवा अपने इष्ट का ध्यान करें और उसके बाद अपने माता पिता का ध्यान कर उन्हें मानसिक प्रणाम करें।
° उसके बाद 21 बार इस मंत्र को पढ़ें-
ॐ नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धनवंतराये: अमृतकलश हस्ताय सर्वभय विनाशाय सर्वरोगनिवारणाय
त्रिलोकपथाय त्रिलोकनाथाय श्री महाविष्णुस्वरूप श्री धन्वंतरि स्वरूप श्री श्री श्री औषधचक्र नारायणाय नमः।
(मंत्र लंबा है अतः किसी कागज पर लिखकर अपने सामने रखकर ध्यान से पढ़ें)
°मन्त्र जपने के बाद दीपक के नीचे से कागज और जौ को सावधानी से निकाल के उसकी पुड़िया बना लें और दीपक को उसी स्थान पर रखा रहने दें।
°अब उस पुड़िया को अपने ऊपर से अथवा जिसके लिए आपने यह उपाय किया है उसके ऊपर से सात बार उतारा करके किसी बहते हुए जल, या पेड़ या कच्ची भूमि में उस पुड़िया को दबा दें उपाय यहीं सम्पन्न हो जाएगा। यदि उपाय उस व्यक्ति के लिए किया गया है जो घर से दूर हो तो इस पुड़िया को बिना उतारा किये आप ऊपर बताये गए किसी एक तरीके से विदा कर सकते हैं।
विशेष- जिन लोगों की आयु पर संकट हो अथवा वैसे भी हर घर के किसी एक व्यक्ति को सभी घरवालों के लिए असमय मृत्यु से बचने और दीर्घकालिक सुखी जीवन के लिए 13 नवम्बर को सांय 5:17 से लेकर सांय 5:59 के मध्य अपने घर के गेट या मुख्य दरवाजे के बाहर एक दीपक अवश्य जलाकर रखना चाहिए और दीपक रखते समय पाँच (5) बार यह मंत्र अवश्य ही पढ़ना चाहिए-
ॐ सूर्यपुत्राय विद्महे महाकालाय धीमहि, तन्नो यमः प्रचोदयात।
(ब) उपाय 2– यह उपाय उनके लिए है जो धन-संपत्ति, विलासिता वैभव और भौतिक सुखों की चाह और कामना रखते हैं तथा वे लोग भी इस उपाय को अवश्य करें जो कर्ज़ या आजीविका की गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हों।
° सर्वप्रथम ऊपर बताये गए धनतेरस के पूजन के समय का ध्यान रखें क्योंकि यह उपाय आपको उसी समय अंतराल में पूर्ण कर लेना है।
° एक साफ नया सूती रुमाल लें और उसे अपने पूजन स्थल पर किसी चौकी या पाटे के ऊपर बिछा दें।
° उस बिछे हुए रुमाल के ऊपर चावल की एक हल्की तह बना दें अर्थात रुमाल पर चावल बिछा देने हैं। चावल बिछाने के बाद रोली या लाल सिंदूर से उन बिछे चावलों पर स्वस्तिक का निशान बना दें यदि स्वास्तिक का चिह्न बहुत अच्छा न बने तो परेशान न हों बस ये समझ लें कि रुमाल के ऊपर चावल बिछाना है फिर रोली या लाल सिंदूर से रुमाल के भीतर चावलों पर एक बड़ा स्वस्तिक बनाना है।
°स्वास्तिक बनाने के बाद उस स्वास्तिक के मध्य में (बीच में) एक चाँदी का नया या पुराना कोई भी सिक्का रखें चांदी का सिक्का न हो तो कोई भी एक या दो रुपये का सिक्का स्वास्तिक के मध्य भाग पर रख दें। सिक्के के ऊपर चन्दन अथवा हल्दी का तिलक लगाएं और उसके बाद थोड़े से चावल उसपर छिड़क दें।
अब इस रुमाल पर बने स्वास्तिक यंत्र के दाहिनी ओर अर्थात आप अपने दाहिने हाथ की ओर एक खड़ी जोत का घी का दीपक जलाएं और दीपक जलाने के बाद स्वयं के मस्तक पर रोली से तिलक करें और अपने कुलदेवता/कुलदेवी अपने ईष्टदेव/ईष्टदेवी और अपने माता पिता को स्मरण कर इस मंत्र को 21 बार जपें (कुलदेवता अथवा इष्टदेव आदि न पता हों तो कुलदेवता और इष्टदेवता को नमस्कार है ऐसा मन में बोलकर अपने माता पिता का नाम लें और मंत्र जपें)
मंत्र यह रहेगा-
ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं महालक्ष्मी धनदा लक्ष्मी कुबेराय मम गृह स्थिरो ह्रीं ॐ नमः
(ह्रीं का उच्चारण ह्रींग (hreeng) रहेगा किन्तु ग की ध्वनि बिल्कुल जरा सी होगी लेकिन इसे लेकर अधिक परेशान न हों जैसे जप पाएं जपें)
°मंत्र जपने के बाद दीपक प्रज्ज्वलित रहने दें अपने दाहिने हाथ से बाएं हाथ में थोड़ा सा जल लेकर दोनों हाथों को साफ करें और उसके बाद चावल से बने स्वास्तिक यंत्र और सिक्के को उसी रुमाल में कलावे आदि धागे से बाँधकर पोटली बना लें और बँधी हुई पोटली को अपने दाहिने हाथ में लेकर अपने धन रखने की अलमारी या लॉकर में उस पोटली को रखते समय पाँच बार यह मंत्र जपें ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः और तुरंत इस पोटली को अपने धन रखने के स्थान पर रख दें और वर्षभर रखा रहने दें। उपाय यहीं सम्पन्न हो जाता है।
नरक चतुर्दशी,दीपावली भाईदूज के शुभ मुहूर्त और दीपावली पर चंचला धनलक्ष्मी को स्थिर और सिद्ध करने के तथा सात्विक वशीकरण आदि के विशेष उपाय के लिए हमारे कल पोस्ट किये जाने वाले लेख की प्रतीक्षा करें।
शेष काली इच्छा!
आचार्य तुषारापात
(ज्योतिष डॉक्टर)
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